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एक हवा का झोंका सा वो आए
के इन आँखों को नज़राना दे गए,
मैं जागा ख़यालों में सारी रात उनकी
के आकर, अपनी नींद मुझको दे गए!!
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रूबरू हुये उनसे पहली दफ़ा हम
के मुझको छोटी सी मुलाकात दे गए,
सिलसिला इशारों में हुआ उनसे
के लफ़्ज़ों मे सब बयाँ होने लगे!!
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यादों में ओंश की बूंदें अब भी है
मलमल की, के हम संग चलते रहे,
न थी बेसब्री मुलाकात की कभी
के रोज़ उनका दीदार होने लगे!!
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उनसे शुरू अभी गुफ़्तगू हुई थी
के हर दास्ताँ उनसे बयाँ होने लगे,
कुछ वक़्त बीता उनके साथ ऐसा
के बेखबर दुनिया से हम भी रहे!!
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कोशिश चन्द पल मिलने की करते
के अपनी दुनिया समेटने हम लगे,
अब तो हर रोज़ एक सा लगता
के मोहब्बत भी उनसे होने लगे!!
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...v!p...
