ये हुस्न तेरा जो देखूँ
मदहोश तुझमे हो जाऊँ,
के पा लूँ जो मैं तुमको
लहरों सा मैं लहराऊँ!
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न करता मैं बात तुमसे
ये तुमको कैसे बतलाऊँ,
जो तेरी आँखों में देखूँ
मैं अचेत सा रह जाऊँ!!
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ये लटाऐं तेरी चेहरे पर
कैसे इनको मैं सरकाऊँ,
घटा सा जो मैं बनता
तेरे केशों को भिगाऊँ!
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ये लाली तेरे होंठों की
मैं भँवर सा फस जाऊँ,
बरसता बूंदों सा इनमें
के लिपटता सा रह जाऊँ!!
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कहूँ कुछ मैं तुमसे या
तुमसे मैं कहलवाऊँ,
के मेरी ही रहना तुम
या तुम्हारा मैं हो जाऊँ!!
...
...v!p...
