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अफ़स़ाना तुमसे है प्यार का
मैं क़ल्ब से जताऊँ कैसे
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गुलज़ार उनसे होता हूँ
ये दूरी दर्मियान बनाऊँ कैसे
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असर उनका ही बहुत है
ये मैं उनको दिखाऊँ कैसे
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वो देखते ग़ौर से मुझको ही नहीं
मैं उनको नज़रों से समझाऊँ कैसे
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वो गुफ़्तगू मुझसे करते नहीं
मैं जुबां से उनको बोलूं कैसे
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मेरी गज़ल है उनके होने से
ये मैं उनको सुनाऊं कैसे
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मेरा... साथ सिर्फ तू है
मैं उसको समझाऊँ कैसे
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मेरा तसव्वुर भी तुमसे
मैं कागज़ में उतारूँ कैसे
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मैं ज़हीर सिर्फ तेरा ही
तेरे बग़ैर ये क़िस्सा कैसे
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...v!p...
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शब्दों का अर्थ
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अफ़स़ाना - कहानी
क़ल्ब - दिल,मन
गुफ़्तगू - बातचीत
गुलज़ार - फूलों सा खिलना
तसव्वुर - कल्पना
ज़हीर- साथी, मित्र
क़िस्सा- प्रेमकथा, झगड़ा
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