May 03, 2020

बे-फ़िक्री सी(Be fikri si)

बे-फ़िक्री सी(Be fikri si)

बे-फ़िक्री सी(Be fikri si)

...
वाकिफ़ तुम भी हो मेरी
बेवजह इस मोहब्बत से,
ख्व़ाबों मे सही मगर...
इसका करार तुमसे करुँ
तो तेरी जुल्फ़ संवारुँ
...
ये ख़लिश भी अजीब सी
जो तेरे कश के धुएं सा,
के मैं घुलता सा नज़र आऊँ
इजाज़त हो सीने में तुम्हारी,
के कुछ देर ठहर भी जाऊँ
...
तू धुएं में उड़ाता सा है
कश-ए-बे फ़िक्र मुझको
मैं जलता तेरे शौक भर को
सीने में तेरे कुछ देर ठहरुं
के थोड़ा सुकून में पा लूँ
...
ये अंधेरा जो दिखता है
मेरे चारों और पसरा
जो तुमको इसमें ढूँढूँ
मैं तलाशूं अंजूम सा तुमको
मिलो तो मह-रु सा मानू
...
...v!p...
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