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ये इक रोज़ की बात रही
कि दोस्त मेरे भी रहे,
कुछ अपनाए से लगे
कुछ पराये से रहे!!
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आलम ऐसा ही रहा
के हम खुद में मदहोश लगे,
कुछ रोज़ होश में वो रहे
कुछ रोज़ होश में हम रहे !!
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साथ उनका ही रहा
ऐसा के जैसे तिनका रहे,
कुछ रोज़ डूबे वो रहे
कुछ रोज़ डूबे हम रहे!!
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हर कोई कहता ही रहा
दोस्ती इक दूजे से रहे,
कुछ बिखरने वो लगे
कुछ बिखरने हम लगे!!
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वो दस्तूर भी अपना रहा
के दल में चलते सब रहे,
कुछ रोज़ बुलाते वो रहे
कुछ रोज़ बुलाते हम रहे!!
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वक्त साथ ही रहा...जो
रुख सबका बतला रहा,
कुछ अब भी साथ देते रहे
कुछ अब भी दूर होते रहे!!
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ये इक रोज़ की बात रही
कि दोस्त मेरे भी रहे,
कुछ अपनाए से लगे
कुछ पराये से ही रहे!!
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...v!p...
